गांधी ! तेरे नामका किसने नही फल पा लिया ?
(तर्ज: हर जगह की रोशनी में . . . )
गांधी ! तेरे नामका किसने नहीं फल पालिया ?
वह हुआ जाहीर ही जिसने तुझे दी गालियाँ ।।टेक।।
नाम तूने रख दिया जीवन के हर पहलूमें भी ।
भक्त भी और बीर भी, सत्याग्रही भी बन गया ।।१।।
हरिजनो का नाम रखने में तुही आगे बढा ।
मन्दिरोंपे जायँ सब,भगवान के जब कह दिया ।।२।।
कंस के कुछ कृष्ण के, कुछ शान के विग्यान के ।
ऐसे जमाने में भी तूने नाम अपना कर दिया ।।३।।
गौ नहीं मारो कहा पीओ नहीं मदिरा कोई ।
पीनेवालोंमे भी तो कुछ मन्त्रिपद सजवा दिया ।।४।।
घूँस लेना और देना है महापातक कहा ।
गांधी की जय बोलकर किसिने करोडो खा लिया ।।५।।
जिसने तेरे नाम पर बरबाद की सब जिंदगी ।
उसके बच्चोंको जमाने ने भिखारी कर दिया ।।६।।
कर दिया आजाद भारत, पर न पूरा आजतक ।
कहत तुकड्या देखता हूँ , साल बीसों होगया ।।७।।