गुरु बिना कौन है ज्ञान दे

(तर्ज : मजसवे बोल रे माधवा... .)

गुरु बिना कौन है  ज्ञान  दे । 
वहि  छोड़े अज्ञान के परदे ।।टेक।।
सब जन जाने स्वारथ अपना।
विषयन के सुख का जो सपना ।।
कौन हैं - इन से मुक्त करा दे ।।1।।
तन-मन-धन का मोह बडा है।
पल -पल दिलसे ही जखडा है।।
जीवन नहिं   रहने  दे   साधे ।।2।।
मेरा - मेरा कर   अभिमाना ।
परम-सूख इनसे ही खोना ।।
यह नहिं मानव-धर्म जगा  दे ।।3।।
कौन हूँ मैं ? किस कारण आया ?
क्या सधना है, नर-तन पाया !
तुकड्यादास कहे यहि साधे ।।4।।