गिरे-गिरे ग्रामों में चलोना जरा !
(तर्ज : मिठी मीठी बातों सें... )
गिरे - गिरे ग्रामों में चलोना जरा !
तबहि तो होगा ग्राम पुरा ! ।।टेक।।
शहरों के बंगलो में बोलोगे।
जरा कदम नहीं खोलोगे ।।
कैसि है भक्ति, कैसि है शक्ति -
अनुभव मारग खालि गिरा ! ।।1।।
शहरों में साधू घुमते हैं ।
शहरों में नेता रमते हैं ।।
कोइ नहिं सुनता, ग्राम कि बाता -
इससेहि ग्राम नहीं सुधरा ! ।।2।।
जाति-पाँतिका झगडा है ।
पंथ -पक्षका रगडा है ।।
पल नहिं, भाँता समान नाता -
आपस में ही होते चुरा ! ।।3।।
जबतक ग्राम न सुधारोंगे ।
तबतक देश न उध्दरोगे ।।
तुकड्या ये कहता,सुनो मेरी बाता -
यह मारग है खरा - खरा ! ।।4।।