गांधी का वह जीवप्राण

  (तर्ज : कैसे करुँ तेरा ध्यान ? ) 
      गांधी का वह जीवप्राण,
अरे भाई ! गांधी का वह जीवप्राण ।
सच नीती अपनाये, प्रभू मुख गाये,
साची रहन सिखाये ।। गांधी ।।टेक।।
मीठी बात परन्तु साच । हिम्मतबाज गरीब-नवाज ।
भूले नही मिला भी राज ।।
सेवा को अपनाये, पक्ष नहि भाये,
हरदम    भेद   मिटाये ।।गांधी 0 ।।१।।
छुआछुत करमपर होय । बिगडा भी खुदी को धोय ।
संकट में वह कभी ना रोय ।।
हर मानवसे नाता, प्रेम फैलाता,
और न कुछ भी सुहाये ।।गांधी 0।।२।।
यही कहते रहा गांधी । हो तुफान या आँधी ।
नहि भायी  उसे  गंदी ।।
तुकड्या राह बताये,दिखा सोही गाये,
जन-जन  में   पहुँचाये ।। गांधी0 ।।३।।