गांधी का यह मंत्र था
(तर्ज : हे राम तेरे नामका ? ... )
गांधी का यह मन्त्र था, मत भूलना कहीं ।
अच्छे रहो, सच्चे रहो, हर बातमें सही ।।टेक।।
चार दिनकी जिंदगी में,नेक रहो बंदगी में ।
सबकी भलाई में भला, मान लो यहीं ।।१।।
देश डबे तो किसिके,मान कभी रह न सके ।
इसलिए आजाद रही, प्रगत नित्य ही ।।२।।
देशमें हर बात बहे, सोचो,कमी कुछ न रहे ।
भंगी काम की भी हमे, लाज हो नहीं ।।३।।
वक्त पे पूजा भी करे,खेत जाके हल भी धरे ।
सब कलाओं में भला, इन्सान है बही ।।४।।
पहले खुद अमल किया,फिर सबको बोल दिया।
तुकड्या कहे मनको जीत, जीतली मही ।।५।।