गांधी हरवक्तहि कहते थे

             (तर्ज: मेरे दिलमें गुरुने जादु.. . )
गांधी हरवक्तहि कहते थे,जो द्वेष करे वहि द्वेषी तने ।
जो प्रेम करे प्रिय होत वही,गुणग्राहक हो गुणराशि बने ।।टेक।।
जो नेम धरे नीतीपथ का,वहि नीतिमान कहलावेगा ।
अपने बलपर बढता हो कोई,वहि अन्त सुखी अविनाशी बने ।।१।।
आयेगा जमानाही ऐसा, अपनेसे बचो बच पाओगे । 
नहि तो किसी के हो जाओगे, फिर दास बने या दासी बने ।।२।।
किसिको धमकाते अगर चलते, धमकाये किसीसे जाओगे ।
यह ईश्वर का कानून है सही, टलता न कहीं भी उदासी बने ।।३।।
करके सुनिए मेरी बात सही, सच्चेही रहो अच्छेही रहो ।
तुकड्या कहे फिर धोखाहि नही,फिर तो जहाँ वहि काशी बने।।४।।