सत्य का प्रयोग बापू
(तर्ज : समझ में आवे माया...)
सत्य का प्रयोगी बापू, भाग्य से मिला ।
सत्य बनाने को जीवन, मार्ग से चला ।।टेक।।
रोज-रोज ही कहता था,
सत्य रूप ईश्वर का है ।
अमल में जो लावे अपने, होयगा भला ।।१।।
सत्य शब्द सिद्ध पुरातन,
जानते सभी है जन-मन ।
कौन दे रहा बल उसपर,जानके खुला ?।।२।।
व्यर्थ सभी बातें मनभर,
सत्य श्रेष्ठ होता कणभर ।
खींच ले सभी दुनिया को,सत्यकी कला ।।३।।
सत्य बोलने का ब्रत ले,
सिद्ध वाणी होगी उसकी ।
कहे दास तुकड्या,जीवन सत्य में घुला ।।४।।