घर-घर में जन पहिने खादी
( तर्ज : रामभजन बिन को सुख...)
घर - घर में जन पहिने खादी,
सह - उद्योग करे देहाती ,
तभी देश का निभेगा ।।टेक।।
यंत्र बढ़ें जन बेकार, यह नही है देश-सुधार ।
सबको काम मुख में राम,
तभी देश का निभेगा ।।१।।
बापू ने उपदेश दिया, खुद करके बात किया ।
अनुभव हाथ चिन्तन साथ,
तभी देश का निभेगा ।।२।।
ग्रामोद्योग जीवनज्योत,श्रमका मूल्य भाग्यस्रोत ।
कहे तुकड्या कार्य करो
तभी देश का निभेगा ।।३।।