रंग लगादे सबको मोहन !
(तर्ज: हर जगह की रोशनी में... )
रंग लगादे सबको मोहन ! जो तेरे चरखे में था ।
पायी समाधी थी तुने,जाहीर पथ चरखे में था ।।टेक।।
गीताहि थी कफनी तेरी, चारों तरफ रक्षा करे ।
सत् औ असत् के युध्दका, फलभी तेरे चरखे में था ।। १।।
उद्योग तो था ही भला, पर शान्ति की आवाज थी ।
जो था छुपासा मन्त्र सोहम् वहभी तो चरखे में था ।।२।।
फल मिले या ना मिले, पर कर्म करना चाहिए ।
सत्य का सत्याग्रही, वह ग्यानभी चरखे में था ।।३।।
चरखा नहीं वह चक्र था, जो कामरिपु मारे सभी ।
कहत तुकड्यादास, सबका आसरा चरखे में था ।।४।।