गांधी ! तेरी सही अहिंसा
(तर्ज : भजले सद्गुरू नाम निर्तर.....)
गांधी ! तेरी सही अहिंसा, लड़ना ही सिखलाती थी ।कायर बनके मरना अच्छा कभी नहीं कहवाती थी ।।टेक।।
शूर सिपाही बनो,अगर बनता तो खुद बलिदान करो ।
नहि बनता तो लडो भले, पर कायर-सी मत बात करो ।।१।।
मतलब इसका यही निकलता,झूठ-असत्य न सहन करे ।
जैसा हो पग आगे धरो,पर सत्य-विजय की रहन करो ।।२।।
गुण्डागर्दी भारत में गर किसीकी भी हो जाती है ।
तब तो लड़ना महापुण्य है, वहाँ न जाती -पाँती है ।।३।।
अपना हो या कोई पराया, देश नष्ट करवाता है ।
तब तो अपना फर्ज समझकर,लडना पुण्य कहाता है ।। ४।।
अपने कुल का गुरु,पिता या नेता भी जब गेर रहा ।
तुकड्यादास कहे गीताने,लडनाभी सत्कर्म कहा ।।५।।