गाओ गाओ जी ! मधुर गुण गाओ

           (तर्ज: बोलो बोलो रे प्रभुजी..)
        गाओ गाओ जी ! मधुर गुण गाओ ।
ध्यान धरो भवसागर उतरो,मन भावों रंग लाओ ।।टेक।।
सुन्दर मनमोहन की झाँकी,दिल-मन को लगती बडी बाँकी ।
अधर धरी मुरली सुरसाकी, अपना दिल न हटाओ ।। १।।
वे दिन याद रहे न हमारे,जो दिन प्रभु गजराज उध्दारे।
वहिसी गत भारत में प्यारे ! आओजी रंग ना गमाओ ।।२।।
कितने दिन बीते दर्शनको,क्यों भूले मोहन दीननकों ? 
तुकड्यादास कहे भारतपर, फिरफिरसे  बुलवाओ ।।३।।