गुरु महाराज गुरु, भजन कर
(तर्ज : जय जय गुरु महाराज गुरु...)
गुरु महाराज गुरु, भजनकर, गुरु महाराज गुरु ।।टेक।।
गुरुदेव कहनेसे होता। ग्यान -पात्र यह तन बन जाता ।
संयमसे रहने लगता है-बनता अनुभव-तरू ।। भजन कर0 ।।१।।
भक्ती,ग्यान,बैराग सुहावे । विषय -दंभ सारे हट जावे ।
नम्र सदा संतोंके पदमें -मिलता कल्प-तरू ।। भजन कर0 ।।२।।
अगम -निगम की राह भली है । सोsहं की एक तार चली है ।
कुंडलिनी की ऊर्ध्व गती से -पहुँचे परात्परू ।। भजन कर0 ॥। डे ॥।
आत्मग्यान भंडार खुलेगा । सबमें ईश्वर दर्शन होगा ।
तुकड्यादास साक्ष देता है-वह है करूणा करू ।।भजन कर0 ।।४।।