सच्चा धरम नहीं जाना तूने रे भाई । सच्चा धरम नहीं जाना !!

(तर्ज: अनाडी दुनिया भजन बिना कैसे तरिये. ... )

सच्चा धरम नहीं जाना तूने रे भाई ।
सच्चा धरम नहीं जाना !! ।। टेक ॥
माथेपे चंदन, तिलक लगावे, माला गले में भारी।
गरिबन की तो कदर न जाने,क्या बोलेगा बिहारी ! ।। १॥
गेहूँ में कंकड, पेढे में आटा, दूधमें पानि मिलावे।
मीठी बातें, कहकर बेचे, कसम धरम की खावे ! ।।२।।
सरकारी अफसर होकर भी, सेवा करना नहीं सीखा।
अर्जदारों से खाता है पैंसा, देश का गौरव खोता !।।३।।
खालि पडी जो भूमी यह तेरी, मजदूरों को नहिं देता।
देश भिखारी बनाया तूने, देश की इज़त खोता! ।।४।।
अपनी - अपनी नेकिसे चलना,यहि तो ना धर्म सिखाता ?
तुकड्यादास कहे फिर दिनदिन, क्यों पाप सरपे उठाता।। ५ ॥