सत् छोडे पथ जाय

         (तर्ज : मेरी दोस्ती मेरा प्यार...)
सत्‌ छोडे पथ जाय, सत्‌ छोड़े पथ जाय । 
पथ जाये सुरमा, मिले नहीं क्षमा, जीवन व्यर्थ न जाये ।।टेक।।
निंदक लोग करे मजबूर, पर्वतसे करे चकचूर ।
पीछे हटते नहीं है शूर ।
चाहे जल बरसाये, अग्नि जलाये, जीवन - कार्य न जाये ।।१।।
सज्जन लोग पिन्हावे माल, चंदन-फूल लगावे भाल ।
पूजासे ही न होते निहाल ।
अपनी टेक चलाये, अमल कर जाये,जीवन व्यर्थ न जाये ।।२।।
चाहे राज मिले या धन, सुन्दर स्री मिले मधुबन ।
बिगडा जाये नहीं यह मन ।
तुकड्या अनुभव पाये, बात बताये, जीवन व्यर्थ न जाये ।।३।।