रघुबर दिलसे गाइये

         (तर्ज : आज मी ब्रह्म पाहिलें.... )
रघुबर दिलसे गाइये; रघुबर दिलसे गाइये ।
मर्यादा पुरुषोत्तम सियजू ; खटनट रुची मत-लाये नजर भर ।।
नत  हो  जाइये ।। रघुबर 0।।टेक।।
सब सुख तजकर माया के रँग ।
परम स्नेह धर रघुबर के सँग ।।
स्वाँस-स्वाँस नाम-नाव पर, तर जाइये ! ।।३।।
को नहिं तर पाये चरनन से ।
जिसने गुण गाये तन-मनसे ।।
छूत-अछूत न भेद देखी ; प्रभु अपनाइये ! ।।२।।
सब जग राम-रुप लख पाये ।
समझो राम-कृपा मन  भाये ।। 
तुकड्यादास कहे,जशके फल,उर लाइये ! ।।३।।