वो तो बिना जाप - तापसे दर्श दियो है !
(तर्ज : दो हंसो का जोडा. . . )
वो तो बिन जाप-तापसे दर्श दियो है ! ।
मेरे राघव को काहे बदनाम कियो है ?? ।।टेक।।
किसने देखा, कुब्जाने न्हाये - धोये तप किये ?
किसने सुना,भिल्लिनीने यज्ञ -त्यांग-जप किये ? ?
कौन कहे, हाथि ने ब्रह्म-भोज दान दिये ?
कौन कहे, केवट ने ध्यान-ब्रह्मज्ञान किये ? ?
प्रेम - भक्ति देख प्रभू तार दियो है ! ।।१।।
गिध्द कौन शुध्द रहा,व्याध कौन बुध्द रहा ।
वेश्या कौन निर्मल थी,नायीन नहायी कहाँ ।।
कालियाको कौन ज्ञान,बिददुरनी को कौन भान ?
पत्थर में कौन जान,अजामिलको कौन ध्यान ? ?
सुदामाने कितनो धन दान दियो है?।।२।।
जात-पाँत देख प्रभू मानव को तारता ।
बिना योग-याग नहीं,काहँको उध्दारता ।।
सुन्दर शरीर-बिना प्रभू ना निहारता ।
देखो साक्ष इतनो की, झूठ नहीं बारता।।
कहे दास तुकड्या,गवाह दियो है ! ।।३।।