रख मृत्यू की याद, बावरे ! रख मृत्यू की याद !

(तर्ज: माणसा ! माणुसकीने वाग...)
रख मृत्यू की याद, बावरे ! रख मृत्यू की याद !!।।टेक।।
जितना लोभ किया हे तूने, होगा सब बरबाद !
बावरे ! रख मृत्यू की याद ! ।।१॥
जितना खाया, पहिना सोना,अन्त बनेगा खाद !
बावरे ! रख मृत्यू की याद ! ॥२॥
साथ रहेगी नहिं यह तन भी,क्यों लेता आस्वाद ?
बावरे ! रख मृत्यू की याद ! ।।३॥
सत्‌किर्ती सेवाकी पूंजी, यह ही देगी साथ !
बावरे! रंख मृत्यू की याद ! ।।४।।
तुकड्यादास कहे सुध लेले, प्रभू भज हो आबाद !
बावरे ! रख मृत्यू की याद ! ॥५॥