गले तुलसी की माल है । भूल न जाऊँ; इन बातों को

(तर्ज : मेहंदी लगी मोरे हाथ रे...)

गले तुलसी की माल है ।
भूल न जाऊँ; इन बातों को ।।
ना करू काम जहाल हे ! ।।टेक।।
इस कारण पहनी है माला
जल जाये इस दिलका काला ।।
होऊँ प्रभूसे निहाल  है !   ।।१।।
झूठकी संगत पल नहीं भावे  ।
हरंदम दिल प्रभू-नाम रिझावे ।।
झुठे  भव - जंजाल  है !    ।।२।।
ममता-माया मोह न व्यापे । 
अंतसमय कहीं काल न कोपे ।।
तुकड्या कहे,सच हाल है ! ।।३।।