सच्चे सेवक बनेंगे हम, जब आज़ादी को पायेंगे।

(तर्ज: (छंद) हरिका नाम सुमर नर प्यारे...)

सच्चे सेवक बनेंगे हम, जब आज़ादी को पायेंगे।
घरघरमें आबादी देकर, रामराज्य कहलायेंगे।। टेक ।।
अपना घर नहिं अपना है, यह देशहिका कहलायेंगे।
उसके खातिर तन,मन,धन सब न्योछावर कर जायेंगे।
गरिब-अमिर सब एकहि होकर,देशका मान बढायेंगे।
सभी धर्म और सभी पंथका, आदर कर दिखलायेंगे।
मानवताकी ऊँची बिजली, भारतमें फेलायेंगे।
घरघरमें आबादी देकर, रामराज्य. कहलायेंगे ।।1।।

कौन कहता है   के भारत,  होवेगा  हैवानोंका ?
गुंडोका,पापियोंका, कालेबजार,  शौकीयोंका ।
है यह हवा बदल जायगी, जोश बढ़ेगा सेवाका।
शांतिदूत फैलेंगे घर-घर, रोम नहीं होगा बाँका।
नौजवान सब काम करेंगे, सेवासे    नहलायेंगे।
घरघरमें आबादी देकर, रामराज्य कहलायेंगे ।।2।।

धर्म नहीं कहता है- किसिके बहु-बेटीपर निगा करो।
धर्म नहीं कहता है- किसिभी जीवोंपर हथियार धरो।
धर्म नहीं कहता है- किसिके घर लुटो बरबाद करो।
धर्म नहीं कहता है- किसिके मजहबपर आघात करो।
यह जो बातें भूल गये हम, फेर फेर दुहरायेंगे।
घरघरमें आबादी देकर, रामराज्य. कहलायेंगे।।3।।

गुरुदेव - सेवामण्डल ने, अपना फर्ज सुनाया है।
आओ सबमिल साथ करो, सब एक बनो फर्माया है।
देशद्रोह और धर्मद्रोह जो करे, चलो प्रतिकार  करो।
गुरु रहे या बाप   रहे, अपना-दुसरा मत ध्यान धरो।
मत पर्वा तुम करो मरनेकी!- यह संदेह सुनायेंगे।
घरघरमें आबादी देकर, रामराज्य. कहलायेंगे।।4।।

आओ किसमें दर्द भरा है, भारतके बीमारीका।
देता है गुरुदेव दवा उस मरीजको हुशियारीका।
सबसे छोटे बनों ! करो कल्याण सभी नर-नारीका।
उनके खातिर सभी तरीका अजमालो अखत्यारीका।
तुकड्यादास कहे शांतीसे, क्रांती कर दिखलायेंगे। 
घरघरमें आबादी. देकर, रामराज्य कहलायेंगे।।5।।