चल ऊठ मुसाफिर क्यों सोया है? देख जरा रण में ।

भजन ४३ 
(तर्ज : पिया पिलन के कांज... )

चल ऊठ मुसाफिर क्यों सोया है? देख जरा रण में ।
बाज रहा रणबाज मृदंगा, ध्रीमिकट सुरतन में ।।टेक।।

झूठ पसारा देखत भूला, क्यों मरता धनमें ।
कौन तरा है लोभनसे सुन, सार लिजों मनमें ।।१।।

देखत नैनन संत तरे है, छोड़ दूजे पनमें ।
क्यों भटका फिर? जान गुरूको, मत जा कानन में ।।२।।

घरमें देखो लख्ख  उजारा, सुनाद  कर्णनमें ।
कहता तुकड्या चित्त स्थिर कर, देख उलट बनमें ।।३।।