गर्व क्या धरता तनूका ? जान क्षणकी छाय है

(तर्ज : पानलें कहना हमारा... )
गर्व क्या धरता तनूका ? जान क्षणकी छाय है ।।टेक।।
फूल फुलनेको लगाया, फूलके सम वह बगाया ।
फूल तुझको दे दगाया, फूलही सब    खाय   है ।।१।।
कौन दुनियामें रहा है ? पीर-पैगंबर बहा है।
नामकी बूटी जहाँ है,   वोहि   साथी   पाय   है ।।२।।
था बड़ा रावण धनी, उसकी नहीं पाती कनी ।
संत-साधू जग-जनी, सब माटीमें मिल जाय है ।।३।।
दिलको तुकड्या धो रहा, गुरुके चरणमें सो रहा ।
आपमें मन गो रहा, बिरथा समझता  काय   है ।।४।।