चल सुधर, छोड दे माया
(तर्ज : गुजरान करो गरिबी में बाबा... )
चल सुधर, छोड दे माया । इस मायाने तन खाया है ।।टेक।।
नेकीसे कर जगमें डेरा, नरतन तुझको पाया ।
कामक्रोध को मारों फटके, शुध्द करो यह काया है ।।१।।
तन-मंदरमें कादर बैठा, क्यों कायर होपाया? ।
आप लखो बेखलकत म्याने, मस्त हुजुरही छाया है ।।२।।
दो दिन बंदे ! जगमें रहने, पूरब कर्मसे आया ।
चमडे अंदर बैठा कादर, ख्याल करो सुख पाया है ।।३।।
विषयरूप यह पहिया छोडो, धरो अटल धुन भैया! ।
कहता तुकड्या दास गुरुका, नहि तो डुबती नैया है ।।४।।