खोलकर नैनको देखो, उजारा मस्त होता है ।
( तर्ज : अगर है शौक मिलनेका... )
खोलकर नैनको देखो, उजारा मस्त होता है ।।टेक।।
भुले विषयोंमें क्यो फिरते ? इन्हीमें जा सभी मरते ।
दुहीको कोई ना हरते, मिले फिर अंत गोता है ।।१।।
लगाकर नैनको अपने, देख सब रंग के सपने l
उसीमें जाय मन दफने, बने शुक दंग तोता है ।।२।।
कहे तुकड्या छबी टूटी, दिखे सो बात हे झूठी ।
दुही मिटती वही बूटी, गुरुबिन कौन देता है ? ।।३।।