चल खोल नयन, चल खोल नयन

( तर्ज: मेरी सुनले अरज, मेरी सुनले... )
चल खोल नयन, चल खोल नयन,
चल खोल नयन, भ्रम हलका दे ।।टेक।।
सोवत सोवत दिन चले सब, 
रामभजनमें     ढकला    दे ।।१।।
जन्म -मरण इस भ्रमसे होवत,
खुद तर औंरको सिखला दे ।।२।।
कहता तुकड्या भूल न पावे, 
सद्गुरुके गुण टुक    ला    दे ।।३।।