श्रीसद्गुरू ! निजदास सुधारो

( तर्ज : दर्शन बिन जियरा तरसे रे !..)
श्रीसद्गुरू ! निजदास सुधारो ।।टेक।।
महिमा तेरी वेद न जाने, 
कामपाश   तोडो   सब    मेरो ।।१।।
कर्मरेखमें मेख गडाओ,  
भवसागरसे      पार     उतारो ।।२।।
पाँच विषय गुण बंधनकारी, 
जिनमें  रत   हो   डूबन   हारो ।।३।।
नमन-सुमनसे शरणागत जी ! 
कल्पतरूसे   महिमा   अपारो ।।४।।
कहता तुकड्या भाट ख्यारल धर, 
प्रभु मानत तुम्हें त्रिभुबन सारो ।।५।।