गुरु भज गुरु भज, गुरु भज भाई !
(तर्ज : तुम बिन कौन सहायक मेरो.....)
गुरु भज गुरु भज, गुरु भज भाई !
वहि राम वहि श्याम, वहि जान साँई ।।टेक।।
छोड सभी राह भव-दुःखनकी,
एक वही यदुराई ।।१।।
क्षणिक जगत जान, सुख ना इसीमें,
अविनाश करले कमाई ।।२।।
सकल बिघन ईश भजतेही दूर होत,
जनम - मरण टूट जाई ।।३।।
सब स्वारथरत साथी बने है,
तुकड्याको चरण सहाई ।।४।।