गिरिधारी नंदके लाला !

(तर्ज : मोहे मीठी लागी प्यारे... )
गिरिधारी नंदके लाला ! पालनेवाले सब दुनियाके ।।टेक।।
शिर मोर मोरमुकुट पट साजे । बन्सीकी टेर बिराजे ।
जमुनातट नौबत     बाजे,   जमकाल   थरारे   धाके ।।१।।
त्रयलोक भक्त तेरे है । संग ग्वालवाल घेरे है ।
सब ऋषिमुनिजन सुमरे है, जो कि वृंदावन में झाँके ।।२।।
सब अगम- निगम गुण गावे । तोभी तेरा अन्त न पावे ।
सब मिलकर ठाठ नटावे,  गावे   नेति - नेति    बाँके ।।३।।
कहे तुकड्या गोकुल आया । माखनको चुराकर खाया ।
साथीको बताई माया, छाया देख जगत गुण   भाखे ।।४।।