चल सुधर हुशारी करके

(तर्ज : ना छेडी गाली देऊंगी भरने...)
चल सुधर हुशारी करके, हरको धरके काम कर ।।टेक।।
क्यों विषय -लोभमें चटके ? फिर कार उडावे फटके ।
क्या मिलता प्यारे नटके ? डटके हटके नाम धर ।।१।।
क्या खूब लगाकर नाता, फिर आप अकेला जाता ।
साथही मार तू खाता,  माता - भ्राता    प्रेम   हर ।।२।।
बालकपन खेलमें खोया, यौवन विषयन में सोया ।
फिर बूढ़ा होकर रोया,  बोया  पाया   जाम   धर ।।३।।
कहे तुकड्या सुन जग पाओ, तन हरी भजनमें लाओ ।
जन्म-मरणसे छुट जाओ, गाओ भावो राम नर ! ।।४।।