संगत ना करना ऐसी । जिसमें हो ऐसी - तैसी

(गजल - ताल तीन)
संगत ना करना ऐसी । जिसमें हो ऐसी - तैसी ।।टेक।।
गाँजा-दारू मत पी प्यारे ! खा जावेगा धोखा ।
कोई नहीं पूछेगा फिरतो,  पडा   रहेगा     खोका ।।१।।
चोरी -चुगलीवाले  जनसे, हरदम बचते रहना ।
इनके संगमें इत्तफाक से,   आवे     जूते    खाना ।।२।।
स्त्री-आशकके संगसे बलके, बेहत्तर है मरजाना ।
यहाँ वहाँ क्या तीन लोकमें, उसको नहीं ठिकाना ।।३।।
भली भलाई मुखसे बोले, करनीके घर टोटा ।
ऐसे नरके संग में रहके,   दाम     मिलेगा    खोटा ।।४।।
संगत तो ऐसोंकी करना, साचा सुख बतलावे ।
तुकड्यादास बिना सतसंगत, नाहक जन्म घुमावे ।।५।।