गुम गया हमारा लाल
(तर्ज : मुखसे रामभजन कर लेना...)
गुम गया हमारा लाल, जौहरी नहीं मिलता घडघडमें ।।टेक।।
उस लालहिकी कीमत अपारा ।
पूरे नही कुबेर - भण्डारा ।
लाल बना दुनियासे न्यारा जी ! ।।
जो कोई मेरा लाल बतावे, छूटे मेरे हाल ।।१।।
मेरा लाल महीने भूला ।
याद नहीं, क्या किया ठँगूला ?
धरा अनधूला जी ? ।।
बनबन ढूँढूँ लाल बिहाला, बंद दिखे सब ताल ।।२।।
उस लालहिका तेज अपारा ।
जैसा कोट भानु-उजियारा ।
कहाँ छुपा वह लाल हमारा जी ? ।।
काम-क्रोध-मद डाका आया, जबसे भूला ख्याल ।।३।।
बिरला एक जौहरी आया ।
उसने लाल पता बतलाया।
खंडियारे बिच लाल दिखाया जी! ।।
जब लालहिके पास गया तब, फूटा नैनका जाल ।।४।।
पूरी दलाली सद्गुरु खायी ।
तन-मन-धन अर्पण करवायी ।
तुकड्यादास कृपा घर छायी जी ! ।।
सहज सहजमें पाये सद्गुरु, नहीं तो थे कंगाल ।।५।।