संतकी संगती करना
(तर्ज : अगर है शौक मिलने का ...)
संतकी संगती करना, बहू आसान हो भाई !
न हो सकती घमंडीसे, वहाँ लिन जान हो भाई ! ।।टेक।।
बिना सतके बिचारोसे, झूठपर ख्याल ना देना ।
करे निर्धार जो प्राणी, वही मनमान हो भाई ! ।।१।।
संत -संगतही करनेको, हजारोंभी मरे - मरते ।
बिना बैराग्य कायम हो, न होता ध्यान हो भाई ! ।।२।।
विवेकी शस्त्र लेकरके, जो ल्याकतमें खडा होवे ।
सफल होगी उसे संगत, न कर अनमान हो भाई ! ।।३।।
करो सत्-संगती ऐसी, सती गुण आपमें आवे ।
कहे तुकड्या असत् हरके, उधारो जान हो भाई ! ।।४।।