घरभी भुलाय दिया । माईने मेरा
(तर्ज : ऐसे दिवानेको देखा भैया... )
घरभी भुलाय दिया । माईने मेरा, घरभी भुलाय दिया ।।टेक।।
ज्या घरसे हूँ राज चलाया, वह घर लूट लिया ।
नकली घर मुझको बतलाके, आखिर धूल किया ।।१।।
प्रेम लगाकर धन-संपतसे, मुझको खैंच लिया ।
अब नहीं देत राज कुछ मेरा, क्या कहूँ दीन भया ।।२।।
कौन उपाय करूँ गुरूजी! मैं, मेरा मुझ मिलिया ।
आस तेरी मुझको, तुम्हरे बिन कौन दया दिलीया ? ।।३।।
लख चौरासी दुःख सुखोंको, पीछे लगाय दिया ।
कहता तुकड्या लेय हमारी, तुमबिन कौन दया ? ।।४।।