गाया, गाया, जिया फाड-फाडकर गाया ।।टेक।।

(तर्ज : सजना! काहे भूल गये दिन प्यार के...)

गाया, गाया, जिया फाड-फाडकर गाया ।।टेक।।
सन्त कबीरा मोहब्बत तोडी।
मानवता की बात उधेडी।।
फिर कबीरा नहीं बन पाया ।। पाया0।।1।।
रामकथा रस गायक तुलसी।
बालमिकी से रचना सरसी। |
फिर तुलसी नहीं बन पाया ।। पाया0।।2।।
गुरु नानक की ग्रंथ-सम्पदा।
श्रवती भी उपदेश सर्वदा।।
गुरु नानक उनसे न भया ॥। भया0।।3।।
तुकाराम की वाणी गर्जे
उपदेशामृत अमृत बरसे।।
उनसे तुका नहीं बन पाया।। पाया 0।।4।।
गानेवाले लाख  भेये है।
पर साधू बिरलाद रहे है।।
तुकड्याने यही अजमाया !।।पाया 0।।5।।