घर आता है, घर आता है

(तर्ज - बलहारी मैं बलहारी मैं .... )
घर आता है, घर आता है । प्रभुका दासनसे नाता है ।।टेक।।
मद-मत्सरको तोड पियारे ! लोभ-मदादिक छोड सियारे ।
कामादिक सब फोडो प्यारे ! जबही आकर पाता है ।।१।।
सत्य बचनको पास धराले । झूठा मनका भान हराले ।
चित्त सदा एकांत कराले । आपही आप समाता है ।।२।।
नाम हरीके रिझवाता जा । नार परायी माँ कहता जा ।
अंतर निर्मलसे रहता जा । तनमें मोक्ष दिलाता है ।।३।।
संत-चरणपर लीन रहाओ । मगरुरी को छोड कहा हो ।
कहे तुकड्या गुरुके गुण गाओ । तनमें मरण दिखाता है ।।४।।