शिष्य होता वही सच्चा, रखे जो भाव गुरुजीपर

(तर्ज : नकलमें फँस गयी दुनिया... )
शिष्य होता वही सच्चा, रखे जो भाव गुरुजीपर ।।टेक।।
रहे जो दिलमें अनुतापी, नेम औ धर्म जो राखे ।
अलख को जाननेवाला, रहे    साधक   जो   करुणाकर ।।१।।
सदा सावध, सुबुध्दीका, नीति औ युक्ति का प्यारा ।
विचारी और विश्वासी,     भक्ति   में    जो    रहे    तत्पर ।।२।।
रहे बैराग्य तन - मन में, वही सत्‌ शिष्य अभ्यासी ।
मोक्ष का वहहि अधिकारी, कहे तुकड्या यह दिलमें धर ।।३।।