गमका ही काम है, यहाँपर, गमकाही काम है ।।टेक।।
( तर्ज ..तुमको सलाम है...)
गमका ही काम है, यहाँपर, गमकाही काम है ।।टेक।।
जो बोले वह फँसे किचड में ।
काम करे वह पड़े लफड में ।।
ऐसा ही धाम हैं ! ।। यहाँपर0।। 1।।
चाल चलो तो चोर कहावे।
बैठो तो आलसी कहावे।।
ध्यानी को बक नाम है !।।यहाँपर0।।2।।
पहिनो तो होता है घमण्डी ।
रहे लँगोटी तो हो गयी ठण्डी।।
गुण्डी का काम है!।। यहाँपर0 ।।3।।
साधु बनो तो बगुला बोले।
भजन करे तुकड्या सब खोले।।
ले लो अराम है ।। यहाँपर0 ।।4।।