शरण हूँ नारायण यदुराज !

(तर्ज : तू तो उडता पंछी यार ...)
शरण हूँ नारायण यदुराज !
कृपा कर ब्रिदकी रखके लाज ।।टेक।।
भवसागर-जल बहत अपारा, कौन पुरावे काज ? ।
भक्तकाम-कल्पद्रूम तुम हो, दे दो चरण-जहाज ।।१।।
सुमरत गजको दीन्ह सहारा, जलपर नौका गाज ।
शीलासम प्रल्हाद बचाया, दर्श दिन्हो महाराज ! ।।२।।
द्रोपदिकी तुम बीच सभाके, राखी प्रभुजी ! लाज ।
तुकड्याबाल आस गुण गावत, कटवो फेरा आज ।।३।।