गुरु ! कहो लात बतलाना

(तर्ज : सखि पानिया भारत कैसा जाना... )
गुरु ! कहो लात बतलाना, कहाँतलक हमारा आना ? ।।टेक।।
सब मेरा करते करते, कह बार जिते और परते जी ।
मैं कौन नहीं पहिचाना ।। कहाँतलक ०।।१।।
तकदीर बँधा क्या मेरा, नहिं चुकता उसका फेरा जी ।
कब टूट पडे यह गाना ? ।।कहाँतलक ०।।२।।
कर माफ कसुरको मेरी, मैं शरण पढ़ा हूँ तेरी जी ।
दर्शन दे, दीजो ग्याना ।।कहाँतलक ०।।३।।
यहि बात सुनादो स्वामी ! तुम सबके अंतर्यामी जी |
तुकड्या तन बाल दिवाना ।। कहाँतलक ०।।४।।