सत्गुरु भगति दीजिये, सत्गुरु भगति दीजिये।
सत्गुरु भगति दीजिये, सत्गुरु भगति दीजिये।
और सँग आवे धन-दारा, सब झुठे यह जगत् ।।
मोहसे, न्यारो कीजिये।। सत्गुरु0 ।।टेक।।
यद्यपि रहूँ दुनियाँके संगमे।
जाऊँ न उनके झूठे रंगमे। ।
अन्दर मोहे तेरि हो प्रीती ; ऐसा कीजिये ! ।।1।।
सब बोलूँ, खेलू जनतासे ।
पाप न हो थोडा भी मुझसे।।
ऐसी नाथ दया करिके,मोहे अपना लीजिये! 0।।2॥
मै बालक तुमरा कहवाऊँ।
किनके सँग जाऊँ या गाऊँ? ।।
तुकड्यादास कहे, ऐसो वर, सरपे दीजिये! 0।।3।।