खोपिया होकर मजा देखे

(तर्ज : मानले कहना हमारा... )
खोपिया होकर मजा देखे, जगत-परिवारकी ।।टेक।।
ख़ुब तेरी लीला बनी है, साजसे बाहर भितर ।
सब जगह कुदरत भराकर, ले लिया नादारकी  ।।१।।
क्या तमासे हो रहे, तेरे जिगर-आधारसे ।
मरना-जीना कर दिया, माया करे    करतारकी ।।२।।
दूर सब परिवारसे बैठा अजर गोदीहिमें ।
भक्तको दर्शन दिलाकर, दे    रहा    आधारकी ।।३।।
मायाके आधीन हैं जोगी-जुगत अरू बादशाह ।
दास तुकड्या आस लेकर, कर रहा भवपार की ।।४।।