चल ठोक करम पिछु डाल भरम
(तर्ज : अल्लाह का परदा बन्दहि था...)
चल ठोक करम पिछु डाल भरम, यह भोग भरनको ऊठ जरा।
सब तोड़ बला मनमान कला, इस रामभजनको लूट जरा ।। टेक।।
मत ध्यान धरे मत रान चरे, मुख प्रेम जगतसे बोल जरा ।
तो करना सो करताहि रहे, पिछू डाल दिया सो भूल जरा ।।१।।
मरनेकी फिकर कबहू न करे, जीनेकी याद न मान जरा ।
जीना अरु मरना ढोंग समझ, इक ईश्वर-भाव सुधार नरा! ।।२।।
है राज जगत सब भूलरूपी, इस पर विश्वास न डाल जरा ।
तुकड्या न मरा न मरे कबभी, यह मरना-जीना भूल परा ।।३।।