गर दासको न पाते तो, जम-घरको बुलाना होगा

(तर्ज : मैं तो तेरा दास प्रभू ! . . .)
गर दासको न पाते तो, जम - घरको बुलाना होगा ।
जब मुझको पुकारे जम तो, तुमकोभी बुलाना होगा ।।टेक।।
हरगीज हम समझते कि दर्शन न हमें होता है ।
उस कामके मिसे तो भी, दीदार खुलाना होगा ।।१।।
जमराज पुछेंगे मुझको, तुम क्यों न पुण्य करते हो ? ।
तेराहि नाम बोले हम, दोनोंको  झुलाना    होगा ।।२।।
इस बातसे जो डरते तो, हुस्नको बतादो प्यारे ! ।
तुम्हरा न नाम बोले हम, फिरके न बुलाना होगा ।।३।।
आशक हुआ यह दिल तेरे मिलनेके लिये ख्वाजारे ! ।
तुकड्याको पास ले लेना, चरणोंमें डुलाना होगा ।।४।।