रट रामनाम पलपलमें

(तर्ज : गुजरान करो गरिबीमें बाबा ! ....)
रट रामनाम पलपलमें । मिल जा लौ के बादलमें ।।टेक।।
जबलौं रामनाम नहिं गावे, तबलौं बिरथा जन्म गमावे ।
खावे पीवे सुखसे सोवे, फिर     देह     धरे     पलपलमें ।।१।।
रे नर ! क्‍यों किस हेत बनाया, मानुज जन्म व्यर्थही खोया ।
चोरनके सँग मौज किया, फिर लटके   फाँसा      गलमें ।।२।।
यह दुनिया दुखरूप तमाशा, क्यों समझा सुखकी दिल आशा ।
इक दिन डाल  गलेमें    फाँसा,    डारे    कुंभी    जलमें ।।३।।
स्वाँस- स्वाँसपर कदम बढाना, नित ईश्वरमें प्रीत लगाना ।
तुकड्यादास कहे सुख पाना, क्यों फँसता इस छलमें ? ।।४।।