शास्त्र - न्यायोमें सारे भनान गये
(तर्ज : मेरी सुरत गगन में जाय रही .... )
शास्त्र - न्यायोमें सारे भनान गये । भनान गये, दानादान भये ।।टेक।।
एक कहे ईश्वर - गुण गाओ, एकमें कर्म को वाद रहे ।।१।।
एक कहे कालवादी गुणोंको, योगवाद में एक बहे ।।२।।
एक कहे प्रकृती -पुरुषन को, एक ब्रम्हविद्- राज भये ।।३।।
छा: शास्तर खुब वाद कह्यो है, तुकड्या सच अनुभव न लहे ।।४।।