गिरिधारी नंदके लाल ! सब दुनिया के

(तर्ज: अब तुम दया करो महादेवजी... )
गिरिधारी नंदके लाल ! सब दुनिया के पालनवाले ।।टेक।।
बंसी है मधुर तुम्हारी, सुनके. नरनारी हारी ।
गौओंने सुधी बिसारी जी, बस रंग चढानेवाले ।।१।।
सिर मोरमुकुट बनमाला, कुंडलका झलक निराला ।
तन कृष्ण रंग अलबेला जी, नैननको रिझानेबाले ।।२।।
सब ऋषि मुनि ध्यान चढावे, तुमरो नहि अंत लगावे ।
जो प्रीतीसे गुण गावे जी, वह पार उधारणवाले ।।३।।
तुमरा जो नाम उचारे, वह भवसागर जिय तारे । 
तुकड्या कहे संकट टारे जी, भवजाल निवारणवाले ।।४।।