संगमें चोरोंका काहे बजार किया ?
(तर्ज: लीजो लीजो खबरिया.... )
संगमें चोरोंका काहे बजार किया ? ।
माथे पापोंके गंज बढाय लिया ।।टेक।।
दुश्मनोंकी संगती यह नाश कर रही ।
ना कभी प्रभु-भक्तिमें रंगा दिया सही ।
अपने जीवनकी काहे धुलधान किया ?।।१।।
संगती सत्की करो, रहो ख़ुशी सदा ।
है नही धोखा कभी, मरे जिये सदा ।
ये तो बातें ना मेरी तू मान लिया ।।२।।
छोड दे बैमानिको न पार पायगा ।
अंतमें वह काल बडाही दुखायगा ।
कहता तुकड्या समझ, धर ग्यान दिया ।।३।।