खो दिया हमने उमर सब

(तर्ज: मानले कहना हमारा... )
खो दिया हमने उमर सब, ना सुनी कहि संतकी ।।टेक।।
बुजरूगोंने ग्यान लेकर, लिख रखा है ग्रंथ में ।
अब याद आती है हमे, वह ना सुनी कहि संतकी ।।१।।
बालपन खाली गया, और ज्वानिभी बिरथा गयी ।
हूँ पडा बेफाम अब, वह ना सुनी कहि सतकी ।।२।।
पाप करने के बखत, मीठा लगा दिलजानसे ।
जूतियाँ अब पड़ रहीं, वह ना सुनी कहि सतकी ।।३।।
कहत तुकड्या जो गये, यहही सुनाते चलगये ।
तुम साधलो, सुख पाओगे वह ना सुनी कहि संतकी ।।४।।