गाफिल क्यों सोता बन्दे, झूठ ये चोरन के फंदे
(तर्ज : जमपका अजब तडाका बे... )
गाफिल क्यों सोता बन्दे, झूठ ये चोरन के फंदे।।टेक।।
इस फंद म्याने रहा न कोई, इसने सबको लूटा।
पुरब जनम की खोई पुँजी, फिर सिर आवे खूँटा।। १ ।।
आजतलक इस झगडे म्याने, खूब तमासा पाया।
नरतन में कुछ करले करनी, झूठ समझके माया।। २ ।।
मेरा मेरा करके भाई, सारी उमर गमाई।
दगाबाज से सोबत कीनी, अंत अकेला जाई।। ३ ।।
अलख रुप अविनाश पछानो, मत लागों इन छंद ।
कहता तुकड्यादास गुरुका, भटक पड़े हो अंधे ।। ४ ।।