चल उठो करलो तयारी, मौतका दिन आ रहा हैब
(तर्ज : मानले कहना हमारा... )
चल उठो करलो तयारी, मौतका दिन आ रहा हैब ।।टेक।।
धन-हवेली सब भुलेगी, तन-लँगोटी वह खुलेगी ।
बाँसपर काया झुलेगी, यह शिरस्ता आ रहा है ।।१।।
बहन -भाई जोरू-लडके, अंतमें खोजे न तडके ।
सब धनोंपर आय पडके, जूतियाँ तुहि खा रहा है ।।२।।
गोफ कडियाँ लाल जडियाँ, अंतमें सब जाय पड़िया ।
ले चले साथी लकडियाँ वह मजा फिर पा रहा है ।।३।।
कौडी कौडी जोड कीन्ही, चोरने सब अंत छिनी ।
कहत तुकड्या सुन कहानी, दमपेदम यहि रो रहा है ।।४।।