वाहवाह रे ! दुनियादारी है
(तर्ज : जोगन खोजन निकली है...)
वाहवाह रे ! दुनियादारी है । मतलबकी सबमें यारी है ।।टेक।।
स्वारथ खातिर प्रेम करेंगे, बात कराकर प्यारी है ।
अपने मतलब साध लिये फिर, सुने न कोई पुकारी है ।।१।।
मतलबका है चेला, गुरूसे प्रेम लगावे भारी है ।
कहे हमें एक देदो लड़का, जबसे आस तुम्हारी है ।।२।।
कोइ कहे है मामा मेरा, इनमें प्रीत हमारी है ।
मरतेही धन दौर - दौरकर, अपना घर भर डारी है ।।३।।
देवधरम तो करे सदा पर, जरा न दुख सहकारी है ।
तुकड्यादास कहे ऐसोंकी प्रीत तजे गिरिधारी है ।।४।।